अहिंसा, संयम,तप से होगा स्वंय का मंगल - आचार्य महाश्रमण
रायपुर
जैन श्वेतांबर 13 पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी ने कहा कि दुनिया में मंगल की कामना की जाती है,दूसरों के मंगल की कामना की जाती है,स्वंय के जीवन में मंगल कैसे होगा? मंगल के साधन मौजूद हैं बड़ी छोटी सी बात है धर्म बड़ी चीज है ािफर कौन सा धर्म सर्वेत्कृष्ट है कौन सा धर्म मंगलकारी है। अहिंसा,संयम तप तीन सबसे बड़े धर्म हैं। अहिंसा यदि जीवन में है तो वह धर्म है, जीवन में यदि संयम पा लिया तो वह धर्म है ओर जीवन में यदि तप करना आ गया तो वह धर्म है।
अहिंसा को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है,सभी के साथ एक सा व्यवहार हो किसी के प्रति बैर का भाव न हो । यदि मुझे सुख प्रिय हैं वहीं सुख दूसरों के लिये भी प्रिय हों अपने सुख में दूसरों के सुखों का प्रयास करना। धर्म का सार क्या है? जो व्यवहार स्वंय के लिये प्रतिकूल है वह दूसरों के लिये भी प्रतिकूल होगा। जो व्यवहार मैं चाहता हूं वहीं व्यवहार मैं दूसरों के साथ भी करुं। जीवन में तप आवश्यक है दूसरों का अच्छा हो वह तप है। आचार्य महाश्रमण जी ने कहा चातुर्मास और मयार्दा महोत्सव दो बड़े आयोजन हैं। चातुर्मास में हमें शिक्षा मिलती है कि जीवन को कैस संयमित रहते हुए तप किया जाये हमारे कारण से किसी को नुकसान न हो हमारा व्यवहार न केवल मनुष्य जाति से बल्कि प्राणीयों के साथ भी एक जैसा हो। मयार्दा महोत्सव में हमारा जीवन कैसे अनुशासति रहे इसकी शिक्षा प्राप्त होती है। अहिंसा यात्रा में सदभाव,नैतिकता नशामुक्ति सर्वोपरि है। सभी जाति सभी संप्रदाय के लोगों के साथ एक साथ सदभाव पूर्व व्यवहार करना चाहिये यहां तक कि जीव जंतुओं के प्रति भी उनका व्यवहार एक जैसा होना चाहिये। जीवन में पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करना नैतिकता और जीवन में कभी भी शराब या अन्य नशा व्यवसनों से दूर रहना ही नशामुक्ति है।
नशा मुक्ति का लिया संकल्प
आचार्य महाश्रमण जी के अह्वान पर उपस्थित श्रद्धालुजनों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया ओर आचार्यके स्वर के साथ संकल्प लेते हुए कहा कि मैं यथा ईमानदारी का पालन करूंगा,जिंदगी में कभी शराब का सेवन नहीं करुंगा,अन्य किसी भी प्रकार के नशा व्यवसनों का सेवन नहीं करुंगा और अन्य वृत्ती के सेवन को छोडऩे का संकल्प लेता हूं।
आचार्य का दर्शन पान राज्यपाल भी पहुंची
जैन मानस भवन में जैन श्वेतांबर 13 पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी के मंगल प्रवेश के बाद उनका दर्शन प्राप्त करने के लिये महामहिम राज्यपाल अनुसुईया उइके भी पहुंची। उन्होंने दर्शन प्राप्त करने के बाद मंच से ही आचार्यके प्रवचन का श्रवण किया। महामहिम राज्यपाल ने आचार्य के द्वारा कही गई बातों पर अमल किये जाने की अपनी प्रतिबद्धता बताई।
अहिंसा रैली का स्वागत करने उमड़ पड़ा जन समुदाय
जैनम मानस भवन में 16 फरवरी से प्रारंभ होने वाले 157 वां मयार्दा महोत्सव में शामिल होने के लिये रविववार को जैन श्वेतांबर 13 पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी के स्वागत में में उनके अभिनंदन में सभी समुदाय के लोग उमड़ पड़े और विहार करते हुए जैन मानस भवन में उनका मंगल प्रवेश जय महावीर के उदघोषों के साथ हुआ।
आचार्य महाश्रमण जी रविवार की सुबह विहार करते हुए जैसे ही रायपुर शहर की समा में उनका प्रवेश हुआ वहां पहले से ही कतारबद्ध खड़े सभी वर्गों सभी समुदायों और समाज के लोगों ने उनका अभिवादन करते हुए उनका स्वागत किया। जगह-जगह पर उनके सवाग्त के लिये लोग आचार्य महाश्रमण जी के दर्शन को पाने के लालायित थे। आचार्य ने सभी लोगों के अभिवादन को स्वीकार करते हुए उन्हें अपना आशिंर्वाद प्रदान किया। आचार्य के स्वागत में पूरी रैली निकली जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। आगे। आगे रथ पर नगाड़े की थाप और वाद्ययंत्रों के साथ भजन मंडली चल रही थी। रैली के रास्ते में छोटे-छोटे से विभिन्न समुदायों ने टैंट लगाये हुए थे जेसे आचार्य वहां पहुंचे उनहोंने उनका अभिनंदन किया और आचार्य से आशिंर्वाद प्राप्त किया।
जैन मानस भवन में आचार्य का मंगल प्रवेश होने पर वहां जीवन दर्शन पर बच्चों की सजीव झांकी का अवलोकन करने के पश्चात आचार्य ने 13 पंथ किशोर मेंडल द्वारा उनके अब तक संपूण्र जीवन पर आधारित आर्ट गैलरी का अवलोकन किया जिसमें मोहन से मुदित और मुदित से आचार्य महाश्रमण तक के फोटो प्रदर्शित किए गए हैं। इसके बाद आचार्य ने 13 पंथ कन्या मंडल द्वारा मुख्य डोम के पास उनकी अहिंसा सदभावना,नैतिकता और नशामुक्ति की यात्रा के पचास हजार किलो मीटर यात्रा पूरी होने पर बच्चों के द्वारा झांकी के माध्यम से बनाये गये सजीव चित्रण का अवलोकन कर बच्चों ने स्वंय आचार्य को इसकी जानकारी दी आचार्य ने बच्चों को अपना आर्शिाद दिया। आचार्य महाश्रमण जी के सानिध्य में होने वाला यह 11 मयार्दा महोत्सव है जिसका चित्रण बच्चों ने किया जिसमें उन्होंने दर्शया कि उनके सानिध्य में रायपुर से पूर्व किन-किन स्थानों में मायार्दा महोत्सव का आयोजन हो चुका है।
आचार्य के आगमन से राज्य के सभी लोगों का दुख दर्द दूर होगा
पूर्व धर्मस्व व संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी जैन श्वेतांबर 13 पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी के दर्शनलाभ लेने के लिये जैन मानस भवन में पहुंचे उन्होंने आचार्य का दर्शन कर आशिंर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अहिंसा के यात्रा के प्रणेता आचार्य महाश्रमण जी के साथ साधू और साध्वियों का बंगलूरू राजस्थान से यात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ में उनका पड़ाव हुआ है। मैं उनका वंदन अभिनंदन करता हूं। छत्तीसगढ़ के लिये यह अत्यंत सौभाग्य की बात हैं कि आचार्य महाश्रमण जी का आर्शिवाद पूरे देश वासियों को प्राप्त हो रहा है वहीं आज उनका आर्शिवाद राज्य की पूरी जनता को प्राप्त हो रहा। उनके आगमन और आशिंर्वाद से छत्तीसगढ़ वासियों के दुख दर्द दूर होगें । मयार्दा महोत्सव आयोजन समिति को मैं अपनी ओर से बधाई और शुभकामानाएं देता हूं जिन्होने यह पवित्र आयोजन किया।
कुलदीप जुनेजा और महापौर भी पहुंचे आचार्य के दर्शन के लिये
रायपुर उत्तर के विधायक कुलदीप जुनेजा और महापौर एजाज ढेबर भी जैन श्वेतांबर 13 पंथ के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी के दर्शन लाभ लेने के लिये पहुंचे । उन्होंने आचार्य का दर्शन कर उनका आशिंर्वाद प्राप्त किया। विधायक कुलदीप जुनेजा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण जी के आगमन से छत्तीसगढ़ और भी धन्य हो गया।

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